Dharma & MindDharma & Mind

सनातन · तर्क · शास्त्र

धर्म को मानिए नहीं —
पहले समझिए।

वेद, पुराण, महाभारत और रामायण में जो लिखा है, उसके पीछे का कारण क्या है? कौन सी परंपरा किस समय, किस ज़रूरत से बनी — और आज उसका क्या अर्थ बचता है?

यहाँ कोई रूढ़ि नहीं, कोई डर नहीं। सिर्फ़ शास्त्र, तर्क और सरल हिंदी।

Dharma & Mind का प्रतीक चिह्न

काल चक्र

चार युग — एक ही पैमाने पर

पुराणों के अनुसार एक महायुग 43,20,000 वर्ष का होता है, और चारों युग 4 : 3 : 2 : 1 के अनुपात में घटते जाते हैं। नीचे का चक्र उसी अनुपात में बना है — यह कोई कल्पना नहीं, शास्त्र में दी गई संख्या है।

सत्ययुग — 40% त्रेतायुग — 30% द्वापरयुग — 20% कलियुग — 10% महायुग 43,20,000 वर्ष
  • सत्ययुग — 17,28,000 वर्षधर्म रूपी वृषभ चारों पैरों पर खड़ा। एक वेद, एक मंत्र, एक उपास्य।
  • त्रेतायुग — 12,96,000 वर्षधर्म का एक पैर कम। यज्ञ और कर्मकांड का युग। श्रीराम का अवतरण इसी युग में।
  • द्वापरयुग — 8,64,000 वर्षधर्म दो पैरों पर। वेद चार भागों में विभाजित। महाभारत इसी युग का अंत है।
  • कलियुग — 4,32,000 वर्षधर्म एक ही पैर पर। आरंभ 3102 ईसा पूर्व। हम इसी में हैं।

यहाँ क्या मिलेगा

तीन चीज़ें, और कुछ नहीं

न भविष्यवाणी, न डर, न कोई चमत्कार का दावा।

१

शास्त्र का तर्क

हर प्रसंग के पीछे का कारण — क्यों कहा गया, किस संदर्भ में कहा गया, और उसका आधार कहाँ है। कहानी नहीं, तर्क।

२

दुर्लभ प्रसंग

महाभारत, रामायण और पुराणों के वो हिस्से जिन पर आमतौर पर बात नहीं होती — और जिन्हें जानकर समझ बदल जाती है।

३

परंपरा का अर्थ

कोई रीति किस समय, किस ज़रूरत से बनी, और समय के साथ उसमें क्या बदला। रूढ़ि और धर्म का फ़र्क़।

नवीनतम

वीडियो

रोज़ाना एक नया प्रसंग — YouTube Shorts और Instagram पर।


कुछ भी छूटे नहीं

नया प्रसंग सबसे पहले

हर नए लेख और वीडियो की सूचना सीधे आपके ईमेल पर। कोई विज्ञापन नहीं, कभी नहीं।